बुधवार, 27 फ़रवरी 2013

बढ़ते हमले, ट्रटता तिलस्म...


एक जमाना था जब पत्रकारों के जलवे हुआ करते थे । उनकी खबर पर ने केवल कार्रवाई होती थी बल्कि उन्हें खबर के कबरेज की आजादी भी थी । लेकिन अब वैसा नहीं रह गया है । भ्रष्ट तंत्र ने बेईमानों को गेडें का रूप दे दिया है। लोक लाज का भय तो समाप्त हुआ ही है। कार्रवाई नहीं होने से उनके हौसले भी बुलंद है।
यही वजह है कि पत्रकारों के साथ न केवल दुव्र्यवहार की घटना बढ़ी है बल्कि उनकी सुरक्षा को लेकर भीषण सवाल भी खड़े हुए है। पत्रकारों को आये दिन धमकी की घटनाएं ही नहीं बढ़ी है बल्कि लचर सरकार के चलते उनकी हत्या भी होने लगी है । हाल ही में बिलासपुर द्वारा और कांकेर में पत्रकारों की हत्या हुई है जबकि मारपीट भी घटनाएं भी बढ़ी है ।
ताजा मामला राजधानी रायपुर के काईम ब्रांच का है । क्राईम ब्रांच के छापे की खबर पर कव्हरेज करने पहुंचे फोटोग्राफर नरेन्द्र बंगाले से मारपीट की गई जबकि साथ में मौजूद वरिष्ठ छायाकार विजय शर्मा भी दुव्र्यवहार के शिकार हुए । सादे वर्दी में मौजूद  क्राईम ब्रांच के सिपाही अभिषेक ने जिस तरह से बंगाले के साथ करतूत की वह कहीं से भी क्षम्य नहीं माना जा सकता  । ये अलग बात है कि कप्तान साहब ओजीपाल ने घटना की गंभीरता को देखते हुए उस सिपाही को निलंबित कर दिया लेकिन  सवाल यह है कि क्या अब कोई पुलिसवाला ऐसी हरकत नहीं करेगा ।
इससे पहले भी कई पत्रकार पुलिसिया करतूत के शिकार बन चुके है। और हर बार निलंबन के बाद मामला शांत हो जाता हे और फिर यह घटना दुहराई जाती है । निलंबन के साथ सजा का कड़ा प्रावधान क्यों नहीं होना चाहिए । सिर्फ पत्रकार ही नहीं आम आदमी के साथ भी पुलिसिया करतूत को संज्ञान में लेकर जब जक ऐसे लोगो के खिलाफ जुर्म दर्ज नहलीं किया जायेगा ऐसी घटनाएं होती रहेगी ।
सरकार को चाहिए कि वह ऐसी घटनाटनों पर जुर्म दर्ज करने अधिकारियों पर दबाव बनाये ।
और अंत में ...
बजर में पत्रकारों के लिए समान निधि, व्यक्तिगत दुर्घटना के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद देने पहुंचे पत्रकारों में चेहरा दिखाने की होड़ मची रही । इस पर प्रेस क्लब में टिप्पणी होते रही कि किसे सम्मान निधि की अब जरूरत नहीं है ।

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