बुधवार, 19 फ़रवरी 2014

जो दिखता है वह बिकता है...



छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता की अपनी पहचान है, ग्रामीण रिपोटिंग से लेकर छोटी-छोटी खबरों पर यहां के पत्रकारों की पैनी नजर के सभी कायल हैं। लेकिन व्यवसायिकता का रंग भी चढऩे लगा है। बढ़ती महंगाई के बाद भी न तो नये-नये पत्र पत्रिकाओं का प्रकाशन होना ही रूक रहा है और न ही खबरों के तेवर में ही कोई कमी आई है। कमी आई है तो विश्वासनियता पर और इसकी वजह प्रिंट से ज्यादा इलेक्ट्रानिक मीडिया को दोषी माना जा रहा है। जो दिखता है वहीं बिकता है के फामूर्ले पर चल रहे इलेक्ट्रानिक मीडिया के इस युग में भी प्रिंट का जलवा बरकरार है तो इसकी वजह प्रकाशित होने वाली खबरों की विश्वसनियता से ज्यादा पत्रकारों की मेहनत है। वरना कुछ अखबार तो मार्केटिंग के चक्कर में विज्ञापन वाले अखबार भी कहलातें है और उन्हें इस पर कोई रंज भी नहीं है।
पत्रकारों की साहसिक यात्रा...
कांकेर के पत्रकार कमल शुक्ला अपने तेवर के लिए पहचाने जाते हैं। पिछले दिनों नक्सलियों द्वारा पत्रकार नेमीचंद जैन और रेड्डी की हत्या कर दी गई इससे पत्रकार बिरादरी उछेलित है और नक्सलियों के इस घटना के विरोध में पत्रकारों ने पदयात्रा की। धुर नक्सली इलाके में इस पद यात्रा के अपने मायने है और इसका दूरगामी परिणाम भी निकलने की उम्मीद है। इस पद यात्रा में रायपुर से गिरिश पंकज भी शामिल हुए जबकि बस्तर ही नहीं छत्तीसगढ़ भर के तमाम पत्रकारों ने इसे समर्थन देते हुए कई ने तो पदयात्रा भी की।
इधर उधर जाना जारी है...
राजधानी के कई पत्रकारों के साथ यह स्थिति हमेशा बनी रहती है कि आज वे कहां है कल कहां होंगे। इसी कड़ी में जहां से भी अच्छा ऑफर आये वो इधर-उधर जाने से परहेज नहीं करते। पिछले दिनों रामकुमार परमार ने अमृतसंदेश को थाम लिया तो विकास शर्मा भी विजन को अलविदा कर दिया। वैसे चर्चा यह भी है कि अभी कई और पत्रकार इधर-उधर जाने की जुगत में लगे हैं।
जबकि कुछ इलेक्ट्रानिक मीडिया से जुड़े पत्रकार भी प्रिंट मीडिया में जमीन तलाश रहे हैं।
और अंत में...
प्रेस क्लब के चुनाव को लेकर बढ़ते असंतोष से पदाधिकारियों के इस्तीफे की कथित नौटंकी जारी है और कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव तक पदों पर बैठे रहने की मंशा भी वे यदा कदा जाहिर करते है। पदों पर बैठे रहने वालें कार्रवाई की डर से इस्तीफे की बात कर रहे हैं पर कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए बेशर्मी से कहते है कि प्रेस क्लब की इज्जत का सवाल है। पर इस बार सदस्य निलंबन का प्रस्ताव तो रख ही सकते हैं।

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